अनूपपुर। न्यायालय विशेष न्यायाधीष भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अनूपपुर अशोक शर्मा के न्यायालय के विशेष प्रकरण क्रमांक 01/17 के आरोपी रीतेश सिंह पिता प्रेमलाल सिंह उम्र 29 वर्ष निवासी ग्राम भमरा तहसील सेमरिया जिला रीवा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रूपए के अंर्थदंड से दंडित एवं जुर्माने से और धारा 13 (1) (डी) सहपठित धारा 13 (2) के तहत 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार के जुर्माने से दंडित करने का आदेश पारित किया गया है। मामले में राज्य की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी हेमंत अग्रवाल ने पैरवी की है। घटना के संबंध में शिकायतकर्ता प्रकाष सेन पिता जगदीश सेन निवासी पुरानी बस्ती शहडोल म.प्र. ने अपने भतीजे सह शिकायतकर्ता अनंत सेन के साथ लोकायुक्त कार्यालय, रीवा में लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अधीक्षक के समक्ष अभियुक्त रीतेश सिंह ट्रेनिंग आॅफिसर आईटीआई बेनीबारी तहसील पुष्पराजगढ़ के विरूद्ध रिश्वत मांगे जाने के संबंध में प्रस्तुत किया था। आवेदन पत्र के अनुसार प्रकाश सेन आईटीआई बेनीबारी से वेल्डर ट्रेड से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा था उसकी उपस्थिति भी कम थी बीमारी के दौरान बनाए गए मेडिकल को लेकर शिकायतकर्ता प्रकाश सेन एवं अनंत सेन से आरोपी रीतेश सिंह उसकी उपस्थिति पूर्ण कराने के लिए 5 हजार की मांग की गई। शिकायतकर्ता के उक्त आवेदन पर लोकायुक्त कार्यालय द्वारा शिकायत सत्यापन हेतु निरीक्षक विद्यावारिधी तिवारी के साथ रिश्वत की मांग संबंधी बात को टेप करने के लिए कायतकर्ता के साथ बेनीबारी आईटीआई आए जहां पर उसके प्राईवेट आवास में आरोपी से मिलकर कम रिष्वत के संबंध में बात किए जिसमें आरोपी ने 4 हजार की मांग की तब दोनो षिकायतकर्ता ने रिश्वत की राशि को कम करने को कहा तब आरोपी 5 सौ रूपए कम करके 3500 रूपए में राजी हुआ है। बातचीत का टेप करने के पश्चात शिकायतकर्ता द्वितीय शिकायत आवेदन लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दिए। लोकायुक्त कार्यालय रीवा में संपूर्ण औपचारिकताएं पूर्ण कर 24 जून 2016 को करीब 7.30 बजे लोकायुक्त कार्यालय में लोकायुक्त टीम औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बेनीबारी के लिए दोपहर 12 बजे लोकायुक्त टीम बेनीबारी आईटीआई के पास खड़ी हो गई। शिकायतकर्ता का इषारा करने पर निरीक्षक विद्यावारिधी तिवारी टीम के साथ अंदर पहंचे और आरोपी रीतेश सिंह स्टाॅफ रूम में कुर्सी पर बैठा था शिकायतकर्ता ने अपने कार्य के संबंध में उससे बात की तो आरोपी ने शिकायतकर्ता से अपने कार्य के संबंध में उससे बात की तो आरोपी ने शिकायतकर्ता से पैसे लाने की बात कही जहां पर शिकायतकर्ता ने 3500 रूपए आरोपी को दिए, जिसके बाद लोकायुक्त टीम पहुंची जिन्हे देखकर आरोपी ने पैसे फर्श पर फेंक दिया। लोकायुक्त टीम द्वारा पैसे को उठाकर संपूर्ण औपचारिकता पूर्ण कर वापस लोकायुक्त कार्यालय पहुंच आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रमांक 0/16 पंजीबद्ध किया गया जिसे बाद में असल अपराध क्रमांक 210/16 के रूप में मर्ज किया गया। संपूर्ण विवेचना पष्चात मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है जहां न्यायालय द्वारा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, तर्क एवं उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांतो से आरोपी के विरूद्ध लगाए गए आरोप को प्रमाणित मानते हुए दंड से आरोपी को दंडित किया है।
रिश्वत लेने के आरोप पर आईटीआई बेनीबारी रीतेष सिंह को चार वर्ष का सश्रम कारावास

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